Monday, February 17, 2014
प्रोफेशनल आशिक़
एक दिन सड़क से
गुज़रते हुए एक शख्स पर नज़र पड़ी,
तक रहा था वो एक
खिड़की की ओर, देख रहा था बार बार घड़ी,
लगता था किसी घटना
के घटित होने के इंतज़ार में था वो खड़ा,
उसका परेशानी भरा
चेहरा देख मैं ही उससे बोल पड़ा,
क्यों भाई? क्यों इतने
परेशान दिखते हो?
ये घड़ी की तरफ घड़ी
घड़ी देख कर खिड़की को क्या तकते हो?
वो बोला, मैं
प्रोफेशनल आशिक़ हूँ,
लड़की पटाने के सभी
दाव पेंचो से वाकिफ़ हूँ,
खड़ा हूँ यहाँ एक नयी
लड़की को पटाने के चक्कर में,
इस क्षेत्र में सबसे
उत्तम हूँ मैं, कोई नहीं हैं टक्कर
में,
मैं चुटकी लेते हुए
बोला उससे,
लड़की पटाना भी हैं एक
प्रोफेशन?
इतने ज्ञानी हैं अगर
आप,
तो हमें भी दो कुछ
लेसन,
तो वो बोला, लड़की
पटाने में लगते हैं तीन ‘ध’,
जो हैं – धन, धैर्य
ओर ध्यान,
ये तीनो ही वो गुण है,
जो बना सकते हैं तुम्हे महान,
‘धन’ लगता हैं मारने
में टशन,
फॉलो करने में
लेटेस्ट फैशन,
‘धैर्य’ लगता हैं
लड़की के इंतज़ार में,
उसका पीछा करने घर
तक, कॉलेज और बाज़ार में,
और ‘ध्यान’ रखना
पड़ता हैं की कहीं देख ना ले उसके भाई,
वरना हो जायेगी
ज़ोरदार पिटाई,
तो मैं उससे बोला,
मुझमे नहीं हैं इनमे से कोई भी गुण,
ना ही धन, ना धैर्य
ना ध्यान,
बस तू अपने पास ही रख
अपना ये ख़तरनाक ज्ञान,
इतना ख़तरा उठाना
नहीं हैं सही,
अगर लड़की के
परिचितों ने देख लिया कहीं,
तो इतना मारेंगे की
हड्डियाँ अपने स्थान से हट जायेगी,
मैं जा रहा हूँ
पढने, लड़की जिस दिन पटनी होगी पट जायेगी!
बहुत दिनों से ये इक्छा हो थी कि मेरा भी अपना ब्लॉग हो, जहाँ मै भी अपने मन के कुछ फालतू विचार को लोगो के सामने रख सकू ! पहले कभी नहीं था कि कुछ लिखने का काम भी करूँगा कभी ! क्यूकि मई उनलोगो
में से एक हूँ, जो सरस्वती माता को बहुत दूर से ही य़ाद करते है ! मतलब कि पढाई में कम और फेसबुक और ट्विटर से लगाव रखता हूँ ! लेकिन जब से रवीश कुमार जो ndtv के पत्रकार है, उनके ब्लॉग को पढ़ने के बाद मुझे भी लगा कि कुछ चाहिए ! फेसबुक तो बहुत कर कुछ नया करते है ! हाँ करने का ये मतलब सायद ही हो कि सिर्फ मेरे लेख ही मिले आपको कुछ अन्य लोगो के विचार भी चेप के रख दूँ तो कृपया माफ़ करियेगा!
में से एक हूँ, जो सरस्वती माता को बहुत दूर से ही य़ाद करते है ! मतलब कि पढाई में कम और फेसबुक और ट्विटर से लगाव रखता हूँ ! लेकिन जब से रवीश कुमार जो ndtv के पत्रकार है, उनके ब्लॉग को पढ़ने के बाद मुझे भी लगा कि कुछ चाहिए ! फेसबुक तो बहुत कर कुछ नया करते है ! हाँ करने का ये मतलब सायद ही हो कि सिर्फ मेरे लेख ही मिले आपको कुछ अन्य लोगो के विचार भी चेप के रख दूँ तो कृपया माफ़ करियेगा!
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